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Ex-servicemen Re-Employment : सेंट्रल सिविल सर्विसेज में री-एम्प्लॉयमेंट नियम 2026 संशोधन

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Ex-servicemen Re-Employment : सेंट्रल सिविल सर्विसेज में री-एम्प्लॉयमेंट नियम 2026 संशोधन
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क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे देश के वीर जवान रिटायरमेंट के बाद कितनी मुश्किलों से जूझते हैं। सेना नौसेना या वायुसेना से विदा लेने के बाद नई नौकरी ढूंढना कोई आसान काम नहीं। लेकिन अच्छी खबर ये है कि केंद्र सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। एक्स-सर्विसमैन री-एम्प्लॉयमेंट इन सेंट्रल सिविल सर्विसेज एंड पोस्ट्स अमेंडमेंट रूल्स 2026 ने मिलिट्री नर्सिंग सर्विस को स्पष्ट रूप से शामिल कर लिया। ये बदलाव उन बहादुर नर्सों के लिए वरदान साबित होगा जिन्होंने युद्ध के मैदान में घायलों की सेवा की।

यह संशोधन न सिर्फ समावेशी है बल्कि पूर्व सैनिकों की जिंदगी को आसान बनाने वाला। सरल भाषा में समझें तो ये नियम पुराने कानून को मजबूत करते हैं। हम यहां पुराने नियमों नए बदलाव और आवेदन प्रक्रिया सब कुछ स्टेप बाय स्टेप कवर करेंगे। चलिए शुरू करते हैं इस महत्वपूर्ण टॉपिक को।

एक्स-सर्विसमैन रूल्स 1979 का सफर

साल 1979 में बने मूल नियमों ने पूर्व सैनिकों को केंद्र सरकार की नौकरियों में आरक्षण का हक दिया। ये नियम संविधान के आर्टिकल 309 के तहत तैयार हुए। शुरुआत में एक्स-सर्विसमैन की परिभाषा काफी सीमित थी। सिर्फ नियमित सेना नौसेना वायुसेना के कॉम्बैटेंट या नॉन-कॉम्बैटेंट को ही शामिल किया गया।

समय बीता तो कई संशोधन आए, 1986, 1987, 2012 और 2020 में बदलाव हुए। लेकिन मिलिट्री नर्सिंग सर्विस को साफ तौर पर जगह नहीं मिली। इससे MNS अधिकारी असमंजस में रहते थे। अब 2026 का ये नया अपडेट इस कमी को पूरा करता है।

ग्रुप C और D पोस्ट्स में 10 से 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। केंद्र सरकार की जॉब्स में पूर्व सैनिकों को प्राथमिकता मिलती है। आंकड़े बताते हैं कि 2015 में करीब 10 हزار से ज्यादा पूर्व सैनिकों को नौकरी मिली लेकिन 2021 तक ये संख्या घटकर मात्र 3 हजार के आसपास रह गई। नया नियम इसे पुनर्जीवित करेगा।

2026 संशोधन की खास बातें

9 फरवरी 2026 को जारी नोटिफिकेशन GSR 115(E) ने नियम 2(c)(i) में अहम बदलाव किया। पुराने टेक्स्ट से कुछ शब्द हटाकर नया वाक्य जोड़ा गया। अब इसमें साफ लिखा है: “who has served in any rank whether as a combatant or non-combatant in the Regular Army or Navy or Air Force of the Indian Union or Military Nursing Service of the Indian Union”।

ये छोटा सा शब्दों का खेल बड़ा बदलाव लाएगा। MNS के सभी जवान और अधिकारी अब एक्स-सर्विसमैन कैटेगरी में आ जाएंगे। सेंट्रल सिविल पोस्ट्स में री-एम्प्लॉयमेंट आसान हो जाएगा। गजट में प्रकाशन के साथ ही ये नियम लागू हो चुका।

क्यों था ये बदलाव जरूरी। मिलिट्री नर्सिंग सर्विस 1943 से सक्रिय है। द्वितीय विश्व युद्ध में बर्मा और मिडिल ईस्ट में इनकी सेवा रही। स्वतंत्रता के बाद इंदिरा गांधी ने इन्हें कमीशंड ऑफिसर का दर्जा दिया। फिर भी री-एम्प्लॉयमेंट में इनका नाम न होने से परेशानी होती थी।

मिलिट्री नर्सिंग सर्विस का शानदार इतिहास

मिलिट्री नर्सिंग सर्विस की नींव 1881 में पड़ी। ब्रिटिश राज में आर्मी नर्सिंग सर्विस के तहत शुरू हुई। 1926 में इंडियन मिलिट्री नर्सिंग सर्विस बनी। आजादी के बाद 1947 में नाम बदला गया।

ये नर्सेस युद्धक्षेत्र में पैरामेडिक्स की भूमिका निभाती हैं। इंफो-पाक युद्ध कारगिल संघर्ष और पीसकीपिंग मिशन्स में इनका योगदान अविस्मरणीय। आपदा राहत में भी ये सबसे आगे रहती हैं। MNS ऑफिसर्स को लेफ्टिनेंट से ब्रिगेडियर तक प्रमोशन मिलता है।

2026 संशोधन से इन्हें सिविलियन जॉब्स का मौका मिलेगा। ग्रुप C में 10 प्रतिशत ग्रुप D में 20 प्रतिशत कोटा। PSU और बैंकों में 14.5 से 24.5 प्रतिशत आरक्षण। क्लर्क मल्टी-टास्किंग स्टाफ जैसी पोस्ट्स अब आसानी से मिलेंगी।

पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षण और लाभ

एक्स-सर्विसमैन को केंद्र सरकार की भर्तियों में खास सुविधाएं हैं। डायरेक्ट रिक्रूटमेंट में प्रायोरिटी। उम्र में 3 से 5 साल की छूट। ग्रुप C में 10 प्रतिशत ग्रुप D में 20 प्रतिशत कोटा। CAPF में असिस्टेंट कमांडेंट तक 10 प्रतिशत।

बैंकों में ग्रुप C के लिए 14.5 प्रतिशत D के लिए 24.5 प्रतिशत। रेलवे PSU में भी यही पैटर्न। लेकिन आंकड़े चिंता पैदा करते हैं। 2014 में 2322 से 2015 में 10982 बढ़ी लेकिन 2021 तक 2983 पर सिमट गई। MNS को शामिल कर ये संख्या बढ़ेगी।

अन्य लाभों में OROP पेंशन ECHS मेडिकल सुविधा DGR रिसेटलमेंट स्कीम्स। शिक्षा सहायता केंद्रीय सैनिक बोर्ड वेलफेयर फंड। ये सब मिलकर सैनिक जीवन को सम्मानजनक बनाते हैं। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोत देखें: DoPT नोटिफिकेशन

आवेदन प्रक्रिया: आसान स्टेप्स

री-एम्प्लॉयमेंट के लिए UPSC SSC जैसी परीक्षाओं में अप्लाई करें। फॉर्म में ESM कोटा सिलेक्ट करें। जरूरी कागजात: डिस्चार्ज सर्टिफिकेट PPO मेडिकल फिटनेस।

  • सबसे पहले dopt.gov.in या ssc.nic.in जैसी साइट्स चेक करें
  • नोटिफिकेशन डाउनलोड कर योग्यता जांचें
  • ऑनलाइन फॉर्म भरें ESM सर्टिफिकेट अपलोड करें
  • परीक्षा दें मेरिट में प्राथमिकता पाएं

MNS वाले अपनी सर्विस को रेगुलर सर्विस प्रमाणित कराएं। ट्रेनिंग पीरियड को अनुभव माना जाता है अगर पोस्ट मैच करे। जॉब ट्रेनिंग कम समय में पूरी करें।

संशोधन का असर और भविष्य

ये बदलाव 5000 से ज्यादा MNS कर्मियों को लाभ देगा। पूर्व सैनिकों का री-हैबिलिटेशन मजबूत होगा। सरकारी नौकरियों में ESM भर्ती बढ़ेगी। महिलाओं को सैन्य सेवा में और सम्मान मिलेगा।

सरकार का नोटिस बिल्कुल साफ है हर सैनिक का सम्मान। DGR और केंद्रीय सैनिक बोर्ड से जुड़े रहें। अगर आप पूर्व सैनिक हैं तो ये सुनहरा मौका हाथ से न जाने दें।

Frequently Asked Questions

मिलिट्री नर्सिंग सर्विस को ESM में क्यों जोड़ा गया

असमंजस दूर करने के लिए। अब कॉम्बैटेंट नॉन-कॉम्बैटेंट सभी कवर।

कितना आरक्षण मिलेगा

ग्रुप C में 10 प्रतिशत D में 20 प्रतिशत।

नियम कब लागू हुआ

गजट प्रकाशन के साथ तुरंत।

Disclaimer: ये जानकारी शैक्षिक उद्देश्य से है। आधिकारिक अपडेट्स के लिए DoPT वेबसाइट चेक करें।

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