DPRS Peer Review 2026 : रेलवे बोर्ड ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब रिटायर्ड सरकारी अधिकारियों को Detailed Project Reports (DPRs) की पीयर रिव्यू के लिए लगाया जाएगा। इससे प्रोजेक्ट्स में समय और लागत की बचत होगी।
यह फैसला 13 जनवरी 2026 को जारी रेलवे बोर्ड के आदेश से आया है। भारतीय रेलवे के बड़े प्रोजेक्ट्स अब और मजबूत आधार पर खड़े होंगे। आइए समझते हैं इसकी पूरी बात।
DPRS Peer Review Overview
DPR यानी Detailed Project Report। यह किसी रेलवे प्रोजेक्ट का ब्लूप्रिंट होता है। इसमें तकनीकी व्यवहार्यता, लागत अनुमान, साइट कंडीशंस सब कुछ शामिल होता है।
रेलवे ज्यादातर कंसल्टेंट्स से FLS (Final Location Survey) और DPR बनवाता है। लेकिन कई बार DPR में कमियां रह जाती हैं। इससे प्रोजेक्ट्स में बदलाव होते हैं और लागत बढ़ जाती है।
रिसर्च बताती है कि भारतीय रेलवे के कई प्रोजेक्ट्स में 20-30% तक कॉस्ट ओवररन होता है। DPR की मजबूत समीक्षा से यह कम हो सकता है।
DPRS Peer Review New Notification
रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवेज को निर्देश दिया है। हर DPR की पीयर रिव्यू सेक्टर एक्सपर्ट्स से करानी है। ये एक्सपर्ट्स रिटायर्ड IRSE (Indian Railway Service of Engineers) अधिकारी होंगे।
पायलट बेसिस पर हर जोनल रेलवे 3 प्रोजेक्ट्स चुनकर यह लागू करेगी। 6 महीने में रिपोर्ट बोर्ड को देनी होगी। इससे प्रक्रिया की उपयोगिता पता चलेगी।
यह आदेश रेलवे बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है।
DPRS Sector Expert Qualification
उम्र 75 साल से कम होनी चाहिए। BE/B.Tech सिविल इंजीनियरिंग में डिग्री जरूरी। IRSE अधिकारी SAG लेवल या इससे ऊपर से रिटायर्ड।
कम से कम 5 साल का अनुभव रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में। DPR कंसल्टेंट या प्रोजेक्ट से कोई कनेक्शन न हो।
जोनल रेलवे अपनी वेबसाइट या अखबारों में नोटिस जारी करेगी। 15 दिन में आवेदन मंगाए जाएंगे।
Empanelment Process for Peer Review
एम्पैनलमेंट कमिटी बनेगी। इसमें CAO/Construction कन्वीनर, FA&CAO(C), PCE शामिल।
कैंडिडेट्स के CV चेक होंगे। GM की मंजूरी से पैनल बनेगा। कंफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट से बचाव होगा।
पैनल 3 साल के लिए वैलिड। अच्छे परफॉर्मेंस पर 1 साल एक्सटेंशन। सालाना रिव्यू होगा।
What will be checked in peer review ?
एक्सपर्ट DPR को डिटेल में देखेगा। तकनीकी व्यवहार्यता, कॉस्ट एस्टीमेट, एलाइनमेंट, सर्वे डेटा।
साइट विजिट हो सकती है। पर्यावरण, सेफ्टी, कंस्ट्रक्टेबिलिटी चेक। गैप्स ढूंढकर सुझाव देना।
रिपोर्ट में ऑब्जर्वेशंस, फाइंडिंग्स, रेकमेंडेशंस। 10 दिन में सबमिट, ड्राफ्ट CAO/C को दिखाना।
एक FLS से निकले सभी DPR एक ही एक्सपर्ट रिव्यू करेगा, कंसल्टेंट को रिवाइज करने को कहा जा सकता है।
Arrangements for Honorarium and Logistics
1 लाख रुपये प्रति दिन मानदेय, प्लेन एरिया में 50 किमी प्रति दिन, हिली में 30 किमी। ऊपर राउंड अप।
उदाहरण: 23 किमी पर 1 दिन का पेमेंट, 80% ड्राफ्ट पर, 20% फाइनल पर।
TA/DA रिटायर्ड अधिकारी के एंटाइटलमेंट से, साइट विजिट का खर्चा कंस्ट्रक्शन ऑर्गनाइजेशन देगा।
खर्चा प्रीलिमिनरी एक्सपेंस हेड से। अलग संक्शन नहीं।
गोपनीयता और निगरानी के नियम
सभी DPR कॉन्फिडेंशियल, थर्ड पार्टी को शेयर नहीं।
CAO(C) किसी भी समय 15 दिन नोटिस पर टर्मिनेट कर सकता, मिसकंडक्ट पर तुरंत।
एक समय 4 DPR से ज्यादा नहीं। परफॉर्मेंस मॉनिटर। खराब पर डीलिस्ट।
जोनल वेबसाइट पर पैनल लिस्ट ऑनलाइन। सालाना रिव्यू।
रेलवे प्रोजेक्ट्स में समय-लागत ओवररन क्यों होता है?
DPR स्टेज पर गैप्स से स्कोप चेंज होता है। कंस्ट्रक्शन शेड्यूल बिगड़ता।
रेलवे बोर्ड ने पहले भी PEC (Project Evaluation Committee) से चेक कराया। लेकिन अब स्वतंत्र पीयर रिव्यू।
50 करोड़ से ऊपर प्रोजेक्ट्स के DPR में फाइनेंस चेकलिस्ट भी। लैंड कॉस्ट, रेट एनालिसिस सही हो।
रिटायर्ड अधिकारियों को क्यों लगाना सही ?
रेलवे पहले से रिटायर्ड अफसरों को एडवाइजर बनाता रहा। 2024 में भी ऐसा सर्कुलर आया था।
अनुभव से प्रोजेक्ट प्लानिंग बेहतर। नई भर्ती का इंतजार नहीं। क्विक सॉल्यूशन।
NWR ने फरवरी 2026 में एम्पैनलमेंट नोटिस जारी किया। जल्द शुरू होगा।
फायदे क्या होंगे रेलवे को?
हाई क्वालिटी DPR से कॉस्ट ओवररन कम। टाइम सेविंग।
ट्रैफिक डेटा, जियो टेक्निकल, हाइड्रोलिक डिजाइन सही। लोकल मटेरियल यूज।
सेफ्टी, ट्री फेलिंग, लोकल कंसल्टेशन चेक, ROB/RUB ड्रॉइंग्स अप्रूvd।
प्रोजेक्ट इंफ्रास्ट्रक्चर एडेक्वेट, अनावश्यक आइटम्स हटेंगे।














