Railways Miscellaneous Group B Promotions: क्या आप रेलवे के मिस्केलिनियस या आइसोलेटेड कैडर में काम करते हैं और ग्रुप बी पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं? हाल ही में रेलवे बोर्ड ने एक बड़ा बदलाव लाया है, जो आपकी प्रमोशन प्रक्रिया को पूरी तरह बदल देगा। यह केंद्रीकृत कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) और टैबलेट आधारित टेस्ट (TBT) पर आधारित है, जो पारदर्शिता और निष्पक्षता लाएगा।
आइए जानते हैं इस नए नियम की पूरी डिटेल, कैसे लागू होगा, क्या फायदे हैं और आपको क्या तैयारी करनी चाहिए। यह जानकारी रेलवे बोर्ड के आधिकारिक पत्र पर आधारित है, जो 16 अप्रैल 2026 को जारी हुआ।
रेलवे ग्रुप बी प्रमोशन क्या होता है?
रेलवे में ग्रुप बी प्रमोशन का मतलब है ग्रुप सी से ग्रुप बी स्तर पर जाना। मिस्केलिनियस कैडर में स्टेनोग्राफर, क्लर्क जैसे पद आते हैं, जबकि आइसोलेटेड कैडर में स्पेशलाइज्ड रोल जैसे सेफ्टी इंस्पेक्टर या कुछ टेक्निकल पोस्ट। पहले ये प्रमोशन जोनल लेवल पर होते थे, लेकिन अब सेंट्रलाइज्ड हो जाएंगे।
यह बदलाव रेलवे बोर्ड के पत्र नंबर E(GP)2026/2/5 से आया है। यहां क्लिक करें रेलवे बोर्ड का मूल पत्र देखने के लिए। इसमें साफ कहा गया है कि 100% सिलेक्शन CBT/TBT से होंगे।
भारतीय रेलवे में हर साल हजारों कर्मचारी ग्रुप बी के लिए अप्लाई करते हैं। 2025 में ही ministerial और isolated कैटेगरी में कई वैकेंसी निकली थीं, जो बताती हैं कि डिमांड कितनी ज्यादा है।
केंद्रीकृत CBT/TBT क्यों लाया गया?
पहले जोनल रेलवे में अलग-अलग लिखित परीक्षाएं होती थीं, जिससे देरी होती थी और कभी-कभी असमानता के आरोप लगते थे। अब केंद्रीकृत CBT/TBT से एक ही प्लेटफॉर्म पर सभी का टेस्ट होगा, जैसे RRB NTPC या ग्रुप डी में होता है।
रेलवे बोर्ड ने 23 जनवरी 2026 के पत्र में पहली बार इसकी योजना बताई थी। अब 16 अप्रैल 2026 के अपडेट में ट्रांजिशन प्लान दिया गया है। इसका फायदा? समय की बचत, ऑनलाइन मोड से कहीं भी टेस्ट, और रिजल्ट जल्दी।
रिसर्च बताती है कि CBT मोड से 30-40% समय कम लगता है प्रक्रिया में। रेलवे जैसे बड़े ऑर्गनाइजेशन में जहां लाखों कर्मचारी हैं, यह क्रांतिकारी बदलाव है।
CBT और TBT में क्या अंतर है?
CBT कंप्यूटर पर होता है, जबकि TBT टैबलेट पर। दोनों ऑनलाइन, मल्टीपल चॉइस क्वेश्चन बेस्ड। रेलवे बोर्ड अभी मोडालिटी फाइनल कर रहा है, लेकिन उम्मीद है 2027 से शुरू होगा।
नया नियम कब से लागू होगा?
मुख्य चक्र 1 जनवरी 2027 से 31 दिसंबर 2028 तक का कॉमन वैकेंसी साइकिल। अगर आपकी नोटिफिकेशन पहले जारी हो चुकी है, तो प्रक्रिया 30 जून 2026 तक पूरी हो जाए। उसके बाद ओवरलैपिंग वैकेंसी को नए साइकिल में एडजस्ट किया जाएगा।
अगर नोटिफिकेशन नहीं हुई, तो मौजूदा वैकेंसी को 2027 साइकिल में क्लब कर दिया जाएगा। मतलब, कोई वैकेंसी वेस्ट नहीं जाएगी। यह ट्रांजिशन स्मूथ बनाने के लिए है।
रेलवे में हर 2 साल में वैकेंसी साइकिल चलती है। 2027-28 साइकिल में मिस्केलिनियस और आइसोलेटेड कैडर के लिए हजारों पोस्ट आ सकती हैं।
पुरानी प्रक्रियाओं का क्या होगा?
जो सिलेक्शन पहले से चल रहे हैं, उन्हें पूरा होने दो। लेकिन डेडलाइन 30 जून 2026 है। उसके बाद सब नया सिस्टम। अगर आपकी वैकेंसी ओवरलैप कर रही है, तो नए साइकिल में एडजस्टमेंट होगा।
उदाहरण लीजिए, मान लीजिए नॉर्थर्न रेलवे में स्टेनो की नोटिफिकेशन मार्च 2026 में आई, तो जून तक खत्म हो। बाकी नए CBT से। यह रेलवे बोर्ड के डिप्टी डायरेक्टर एस्टट (GP) मंदीप कुमार ने साइन किया पत्र में।
CBT/TBT की तैयारी कैसे करें?
सबसे पहले सिलेबस समझें। जनरल नॉलेज, रेलवे रूल्स, मैथ्स, रीजनिंग जैसे टॉपिक्स। RRB पैटर्न से मिलता-जुलता।
- रोज 2 घंटे प्रैक्टिस करें ऑनलाइन मॉक टेस्ट।
- पिछले साल के पेपर सॉल्व करें।
- रेलवे एक्ट, IR नियम पढ़ें।
- टैबलेट टेस्ट के लिए टच स्क्रीन प्रैक्टिस।
ऐप्स जैसे Testbook, Gradeup यूज करें। कोचिंग जॉइन करें जो रेलवे स्पेसिफिक हो। 6 महीने की तैयारी से 80% चांस सिलेक्शन का।
महत्वपूर्ण टिप्स सफलता के लिए
कई कर्मचारी पूछते हैं, नेगेटिव मार्किंग होगी? हां, CBT में आमतौर पर होती है। स्पीड और एक्यूरेसी पर फोकस।
ग्रुप बी में प्रमोशन से सैलरी 50-60 हजार बढ़ जाती है, प्लस पावर। इसलिए कॉम्पिटिशन हाई।
इस बदलाव के फायदे क्या हैं?
पहला, पारदर्शिता। कोई लोकल बायस नहीं। दूसरा, समय बचत। पहले 1-2 साल लगते थे, अब महीनों में। तीसरा, ऑल इंडिया लेवल चांस। छोटे जोन के कर्मचारी भी बड़े पोस्ट पा सकेंगे।
रेलवे बोर्ड का यह कदम डिजिटल इंडिया से मैच करता है। 2026 में रेलवे ने पहले भी NTPC CBT रिसिड्यूल किया था, जो दिखाता है सिस्टम मजबूत है।













